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"आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः"

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"आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः" : हर दिशा से आने वाले शुभ विचारों का स्वागत करें "एक दीपक दूसरे दीपक से प्रकाश लेता है, लेकिन उसका प्रकाश कम नहीं होता। ज्ञान भी ऐसा ही है—जितना बाँटो, उतना बढ़ता है।" संस्कृत मंत्र "आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः" — ऋग्वेद (1.89.1) हिन्दी अर्थ "हमारे पास संसार की सभी दिशाओं से कल्याणकारी विचार और श्रेष्ठ ज्ञान आते रहें।" कितना अद्भुत विचार है! हजारों वर्ष पहले हमारे ऋषियों ने यह नहीं कहा कि केवल हमारी ही बात सत्य है, केवल हमारा ही ज्ञान श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा— "जहाँ कहीं से भी अच्छे विचार मिलें, उन्हें स्वीकार करो।" यही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता रही है। **"ज्ञान का कोई धर्म नहीं होता, सत्य का कोई देश नहीं होता।"** अक्सर मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या अज्ञान नहीं होती, बल्कि यह भ्रम होता है कि "मैं सब जानता हूँ।" जब व्यक्ति सीखना बंद कर देता है, तब उसका विकास भी रुक जाता है। एक बंद खिड़की में ताज़ी हवा नहीं आ सकती। वैसे ही बंद मन में नए विचार प्रवेश नहीं कर सक...

अनुगच्छतु प्रवाह

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अनुगच्छतु प्रवाह : जीवन का प्रवाह रोकना नहीं, समझना सीखो "नदी कभी पहाड़ों से लड़कर समुद्र तक नहीं पहुंचती, वह रास्ता बनाते हुए बहती रहती है।" "अनुगच्छतु प्रवाह" अर्थात् — प्रवाह के साथ चलो। यह संस्कृत का छोटा सा वाक्य है, लेकिन अपने भीतर जीवन का एक गहरा रहस्य छुपाए हुए है। अक्सर हमने देखा है कि जब भी जीवन हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता, हम बेचैन हो जाते हैं। नौकरी न मिले तो दुख, रिश्ता टूट जाए तो दुख, योजना असफल हो जाए तो दुख। हम जीवन से लड़ने लगते हैं। लेकिन प्रकृति का नियम कुछ और कहता है। नदी को देखिए। जब उसके रास्ते में चट्टान आती है तो वह चट्टान से युद्ध नहीं करती। वह अपना मार्ग बदल लेती है, लेकिन बहना नहीं छोड़ती। और अंततः वही नदी समुद्र तक पहुँच जाती है। **"जो झुकता है वही टिकता है, जो बहता है वही बढ़ता है।"** मुझे अक्सर बाँस के वृक्ष का उदाहरण याद आता है। आंधी आने पर विशाल वृक्ष टूट जाते हैं, लेकिन बाँस झुक जाता है। आंधी के बाद वह फिर सीधा खड़ा हो जाता है। जीवन में भी जो परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेते हैं, वे टूट...

हाय री बारिश.....!

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 हाय री बारिश। .....                       " शहर घुसेंगे नदियों में तो                                 नदियां घुस जायेंगी  शहर में                         तुम रोकोगे पानी की डगर                                   पानी रुक जाएगा डगर में।"                                                          -स्वानंद किरकिरे                 बारिश का बवाल जो बारिश के हर सीजन में मचता है।  मुंबई ,दिल्ली ,बेंगलुरु ,चेन्नई  हर शहर में नर्क का ट्रेलर नजर आ रहा है।        ...

मैं और मेरा चाँद 😍🥰🥰

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  ...एक बार चाँद ने कहा समंदर से....                                                                                तू उबलता है मेरे प्यार में...    पर कभी मिलता नहीं यही असफलता है तेरे प्यार में  .....समंदर ने भी कहा...यार चाँद मिलने को तो मेरा मन भी मचलता है प्यार में......पर क्या करूं...तू महीने के तीस दिन बदलता है प्यार में .... ☺.....                                                                                                     ऊपर लिखी कविता गीतकार स्वानंद किरकिरे ने लिखी है|....चाँद कि...

Gaslighting -pychological manipulation

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            "गैसलाइटिंग" वर्ड ऑफ द ईयर           गैसलाइटिंग का क्या मतलब है?    इस वर्ष इस शब्द की सर्चिंग में 1740% का इजाफा हुआ है 😲इसलिए ही ये वर्ड ऑफ द ईयर घोषित हुआ है|                                                                      आसान शब्दों में कहा जाए तो "अपने फायदे के लिए दूसरे को भरमाना है|" दिमाग कि दही करना"..🤣 या फिर 'ब्रेन किडनैपिंग' यानी किसी के साथ मनोवैज्ञानिक तौर पर इस तरह खेल खेला जाए और उसे धोखे मे रखते हुए इस तरह से भ्रमित कर दिया जाए कि पीड़ित शख्स कोअपने विचारों और खुद की काबिलियत पर संदेह होने लगे |कई लोगों को इस बात का पता भी नहीं चलता कि वो इसका शिकार हो रहे हैं|  और ऐसा करने वाले, आपके परिवार के सदस्य, दोस्त, आपका पार्टनर ,आपका डॉक्टर, आपका पड़ोसी , आपका बॉस कोई भी हो सकता है|    ...

mensturation and sanitary napkins ...lets talk about period...and safe healthcare for women in our country

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"women are born with pain build in". ....                ये लाइन मैंने एक  पॉडकास्ट  में सुना था तब से ये मेरे मन  में घर कर गयी  है।पुबर्टी ,पीरियड   का दर्द ,चाइल्ड बर्थ का दर्द ,एबॉर्शन का दर्द ,pcos और मेनोपोज़। बचपन  से  लेकर बुढ़ापे तक साला  ये   दर्द कभी ख़तम ही नहीं होता। उपाय है ,मेडिसिन है और तो  और भारतीय महिलाओं की हेल्थ और सेफ्टी के  लिए कई कानून भी हैं। थ्योरी में सबकुछ एकदम फर्स्टक्लास है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।               अनमैरिड हो और gynac के पास जाओ  तो सबसे पहले वो जज करते हैं। शादी के बाद सब ठीक हो जायेगा जैसे दकियानूसी और  सेंसलेस बात करते हैं। अनवांटेड प्रेग्नन्सी की बात आये तो सब बैठ के गॉसिप करते हैं। अगर  सेक्सुअली एक्टिव हो का आंसर हां हुआ तो जज करने में  कोई कमी नहीं रखते।    DO I NOT DESERVE DIGNITY WHEN I AM  SEEKING HEALTHCARE?         2022...

रूबरू..... रौशनी..

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                   "पहली और  सबसे अच्छी जीत स्वयं को जीतना है। " - प्लेटो                आज बड़े दिनों बाद कुछ लिख रही। .. अजीब सा निराशा का  माहौल है। हर दिन सुबह उठकर बस यही सोचती हूँ कि आज कोई बुरी खबर न मिले पर कोरोना ऐसा होने नहीं दे रहा। इतनी सारी मौतें त्रासदी है। पिछले वर्ष का लॉक डाउन भी अकेले बीता  दिया था मैंने और इस बार भी यही सोचा कि ये लॉक डाउन भी कट ही जाएगी। पर इस बार ये लॉक डाउन डरावनी और निराशा भरी रही। इस लॉक डाउन ने ये एहसास करवाया  कि बेचैनी कैसी होती है। मई में मेरे भाई को कोरोना हुआ था जो कि अब पूरी तरह ठीक हो चुका है। और घर में माँ -पापा थे उसको ध्यान रखने के  लिए और मैं यहाँ अकेले हेल्पलेस थी। डर लग रहा था कि माँ -पापा को न हो जाये।और भगवान् का शुक्र है कि माँ -पापा भी ठीक हैं।  वो १५ दिन मेरी जिंदगी के डरावने दिन थे हर वक़्त इतनी बैचेनी ,इतना डर था कि मेरा कहीं मन नहीं लग रहा था। हर वक़्त निगाहें फ़ोन  पे होती थी और नेगेटिव ख्याल आ ...